कितना जरूरी सैक्स में अंगों को चूमना……………………………..

Sex Tips कितना जरूरी सैक्स में अंगों को चूमना 1

Monika R Sherawat

कामिनी महीने में लगभग 26 दिन अपने पार्टनर के साथ अंतरंग होती थी और शायद ही कोई ऐसा दिन जाता होगा जब वह पूरी तरह संतुष्ट न होती हो। उसे अपनी सैक्स लाइफ बेहद शानदार और संतुलित लगती थी।

“डार्लिंग, जल्दी करो न… मैं अब और इंतज़ार नहीं कर सकती,” कामिनी अपने पार्टनर को और करीब खींचते हुए उत्साह से कहती।

“बस दो मिनट और मेरी जान, नीचे भी पहुँच ही जाऊँगा, पहले थोड़ा ऊपर से भी प्यार करने दो,” कहते हुए उसका पार्टनर उसके स्तनों को चूमने और सहलाने में खो जाता।

इस सब के दौरान कामिनी का जोश इतना बढ़ जाता कि वह खुद ही अपने पार्टनर को और पास खींच लेती और अपने भावों से उसे संकेत देने लगती कि अब वह अगले चरण के लिए पूरी तरह तैयार है।

“बताओ मेरी जान, अब मज़ा आ रहा है न?” उसका पार्टनर हल्की शरारत के साथ पूछता।

कामिनी शब्दों में कुछ न कहकर बस धीमे से “हम्म” में जवाब देती। उसका यही उत्तर उसके पार्टनर के लिए काफी होता, क्योंकि वह समझ जाता कि कामिनी अब पूरी तरह उस अनुभव में डूब चुकी है। जब वह इस तरह शांत और एकाग्र हो जाती, तो यह संकेत होता कि संतुष्टि अब बस कुछ ही क्षण दूर है। थोड़ी देर बाद वह अपने पार्टनर से रुकने को कहती और वह समझ जाता कि कामिनी अब पूरी तरह संतुष्ट हो चुकी है।

इस पूरे अंतरंग अनुभव में कामिनी को जिस पल का सबसे अधिक इंतज़ार रहता था, वह यही होता कि उसका पार्टनर उसके शरीर को सहलाने के बाद उसे पूरी तरह अपने प्यार और ध्यान का केंद्र बनाए। इस मामले में उसका पार्टनर बेहद संवेदनशील और समझदार था। उसे कामिनी की भावनाओं और उसके शरीर की प्रतिक्रियाओं का पूरा अंदाज़ा रहता था—कि वह किस स्तर तक उत्तेजित हो चुकी है और कब उसका शरीर स्वाभाविक रूप से आगे के लिए तैयार हो रहा है।

यदि हम भारतीय सामाजिक संदर्भ में सैक्स संबंधों की बात करें, तो एक अहम सवाल सामने आता है—आख़िर कितनी महिलाएँ हैं जो कामिनी की तरह अपनी सैक्स लाइफ में खुलकर संतुष्टि महसूस कर पाती हैं? और कितने पार्टनर ऐसे हैं जो अपनी साथी की खुशी और संतोष को प्राथमिकता देते हैं?

विज्ञान और प्रकृति के नज़रिए से देखें तो सैक्स से जुड़ी कई बातें आम धारणाओं से बिल्कुल अलग हैं। जिसे अक्सर लोग गलत या गंदा मान लेते हैं, वह वास्तव में शरीर की एक स्वाभाविक और स्वस्थ प्रक्रिया होती है।

शारीरिक निकटता, स्पर्श और फोरप्ले के दौरान शरीर में जो संवेदनाएँ पैदा होती हैं, वे महिला के शरीर को स्वाभाविक रूप से तैयार करती हैं। यह तैयारी न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी होती है, जिससे दोनों पार्टनर के बीच का अनुभव और भी गहरा और संतोषजनक बन जाता है।

यही वह प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसके कारण जब महिला को अपने पार्टनर का पूरा ध्यान और अपनापन महसूस होता है, तो वह अंतरंग संबंध के दौरान बहुत जल्दी संतुष्टि तक पहुँच सकती है। सही समझ, समय और भावनात्मक जुड़ाव के साथ यह अनुभव दोनों के लिए सहज और आनंददायक बन जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *